हृदय रोग में कौन सा योग करना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Fri 9th Dec 2022 : 12:49

हृदय रोग से बचने के लिए करें ये 2 प्राणायाम :-

भस्त्रिका प्राणायाम
5 से 10 मिनट तक भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करने से दिल के दौरे के खतरे को कम करता है। इसे सबसे अच्छा सांस से संबंधित प्राणायाम कहा गया है। इसके अलावा, यह शरीर और दिमाग को ताजा करता है। शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। स्मृति को सुधारता है। इसके नियमित अभ्यास से इम्यून सिस्टम बूस्ट होती है। इससे तनाव दूर होता है। रक्त शुद्ध करता है। दिल की बीमारियों को रोकने के साथ ही यह माइग्रेन और अवसाद से भी आपको बचाता है।

यूं करें मस्त्रिका प्राणायाम

सिद्धासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब कमर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर और मन को स्थिर रखें। फिर तेज गति से सांस लें और तेज गति से ही सांस बाहर छोड़ें। सांस लेते समय पेट फूलना चाहिए और छोड़ते समय पेट पिचकना चाहिए। इससे नाभि स्थल पर दबाव पड़ता है।

कपालभाति प्राणायाम

हृदय रोग के लिए कपालभाति प्राणायाम फेफड़ों, स्प्लीन, लीवर, पैनक्रियाज के साथ-साथ दिल के कार्य में सुधार करता है। यह न केवल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है बल्कि धमनी के अवरोध को दूर करने में भी मददगार है।

यूं करें कपालभाति प्राणायाम

ध्यान के किसी आसन में बैठ जाएं। अब आंखों को बंद कर लें। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। अब नाक से तेजी से सांस बाहर निकालने की क्रिया करें। सांस को बाहर निकालते वक्त पेट को भीतर की ओर खींचें। ध्यान दें कि सांस को छोड़ने के बाद, सांस को बाहर न रोककर बिना प्रयास किए सामान्य रूप से सांस को अन्दर आने दें। इससे एक सेकेंड में एक बार सांस फेंकने की क्रिया कह सकते हैं। इसके बाद सांस को अंदर लें। ऐसा करते वक्त संतुलन बनाए रखें। वैसे दिल के मरीजों को कपालभाती प्राणायाम धीरे-धीरे करना चाहिए।

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